Saturday, June 11, 2011

‘मौत का कुंआ’

हजारों की भीड़। भीड़ का बड़ा भाग, उधर चल रहे ‘मौत का कुंआ’ की आ॓र ही क्यों एकत्र हो चला है। पहुंच कर देखा तो रोंगटे खड़े हो गए। कारण था कि कुएं में मोटर साइकिल पर बैठा लड़का क्या तेजी से कुएं के चक्कर लगा रहा है। बैलेंस भी क्या खूब है कि हैंडल छोड़ने पर भी गाड़ी इत-उत नहीं होती। अरे, यह तो इस रपटीली दीवार पर भागती गाड़ी पर भी खड़ा हो सकता है। वाह, देखते ही बनता है। गाड़ी चला वह रहा है और डर वहां मौजूद दर्शकों के मन में घेरे हुए है कि कहीं ऐसा न हो जाए..., कहीं वैसा न हो जाए। खैर, जो हुआ वह तो बेहद रोमांचकारी रहा। सभी ने भरपूर मजे लिए उस 5 मिनट के मौत के शो के। लेकिन यह क्या, शो के बाद मोटरसाइकिल से उतर कर जो अभिवादन कर रही है, वह तो लड़की है। लड़की हो कर इस कदर मौत से जंग लड़ना। बरबस ही मुंह से निकल पड़ता है कि यह है सबसे बड़ी खिलाड़ी। जोखिम भरे खेल को अपना शौक बनाने वाली हैं कलकत्ताा की जुही ठाकुर जो कई राज्यों में लगातार अपनी जाबांजी का प्रदर्शन करती रही हैं।
जुही मौत के कुएं में बेधड़क होकर मोटर साइकिल चलाती हैं। जैसे ही यह कुएं में मोटर साइकिल पर सवार होकर उतरती हैं, हर क्षण उनके लिए मौत और जिन्दगी के बीच का पल होता है। कलकत्ताा की रहने वाली जुही बचपन से ही साहसी, बेधड़क और जोखिम भरे कामों को पसंद करने वाली हैं। मौत के कुएं में उतरते ही इनका जोश, जुनून और आत्मविश्वास देखते बनता है। कुएं के अंदर मोटर साइकिल पर सवार हो जुही जब दर्शकों का अभिवादन हाथ जोड़कर कर करती हैं तो दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
मात्र 14 साल की उम्र में जुही ने किसी महिला को ट्रक ड्राइव करते हुए देखा। अब तक जुही ने यह सुन रखा था कि ट्रक चलाना मदा का काम है महिलाओं का नहीं। लेकिन महिला को ट्रक चलाते देख इनके मन में यह बात कौंधी कि यह कितनी साहसी व बहादुर महिला हैं। इनके साहस की धाक तो पूरा जमाना मानता होगा। यह सोच कर जुही ने भी निश्चय किया कि मैं भी कुछ हट कर ही करूंगी और ऐसा कुछ करके दिखाऊंगी, जहां अभी तक पुरूषों का वर्चस्व माना जाता है। मन में इस बात की उथल-पुथल बनी ही थी कि पास में ही ‘मौत का कुंआ’ (एक खेल जिसमें कुएं के अंदर रपटीली लकड़ी की दीवारों पर मोटरसाइकिल दौड़ाई जाती है) लगा। वह खेल देखकर जुही को बड़ा मजा आया। उसी पल जुही ने मन में यह बात ठानी कि हो न हो अब मैं भी इस खेल में मोटरसाइकिल चलाऊंगी। यह सोचकर जुही ने मोटरसाइकिल चलाना सीखना शुरू किया और सप्ताह भीतर ही मोटरसाइकिल चलाने में परफेक्ट हो गईं। अब मौका था हुनर आजमाइश का। सो, मम्मी-पापा की रजामंदी लेने के बाद जुही कलकत्ताा के एक ग्रुप से जुड़ कर जगह-जगह ‘मौत का कुंआ’ में शो करने लगीं। इतनी सी उम्र में ही 25 शो कर चुकी जुही कब मोटरसाइकिल का हैंडल छोड़ कर ड्राइव करने लगें, कब वे तेजी से भागती मोटरसाइकिल पर खड़ी होकर लोगों का आभिवादन करें, किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए पर्याप्त होता है।

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